गले का दर्द और बुखार परिवारिक चिकित्सालय और आपातकालीन कक्ष में सबसे सामान्य प्रस्तुतियों में से हैं। यह लेख प्रमुख डिफरेंशियल निदान बताता है, वायरल फ़ैरिंजाइटिस, बैक्टीरियल टॉन्सिलाइटिस और एपिग्लॉटाइटिस के बीच के अंतर दर्शाता है और विशिष्ट लक्षण, निदान तथा उपचार का वर्णन करता है। यह Fachsprachprüfung (FSP), ज्ञान परीक्षा (KP), M3 और क्लिनिकल दिनचर्या की तैयारी के लिए उपयुक्त है।
Halsschmerzen und Fieber
Epidemiologie und Altersaspekt
- वायरल संक्रमण सभी आयु समूहों में होते हैं।
- बुज़ुर्ग रोगियों में ये आम तौर पर अधिक गंभीर बनते हैं।
- लगभग 45 वर्ष की आयु के बाद बैक्टीरियल फ़ैरिंजाइटिस का होना अपेक्षाकृत कम होता है।
Leitsymptome
तीव्र शुरुआत वाला गले का दर्द, अक्सर बुखार के साथ।
Differenzialdiagnosen
सबसे महत्वपूर्ण बात यहाँ बैक्टीरियल और वायरल कारणों के बीच अंतर करना है।
वायरल फ़ैरिंजाइटिस सबसे सामान्य कारण है, जैसे राइनोवायरस, एडेनोवायरस, SARS-CoV-2, EBV या इन्फ्लूएंजा वायरस।
बैक्टेरियल टॉन्सिलाइटिस मुख्यतः β-हिमोलिटिक समूह A के स्ट्रेप्टोकोकस के कारण होती है।
एपिग्लॉटाइटिस दुर्लभ है, परंतु संभावित रूप से जानलेवा हो सकती है।
हालांकि लिम्फोमा या तपेदिक गर्दन की लिम्फ नोड वृद्धि (सर्वाइकल लिम्फैडेनोपैथी) के साथ हो सकते हैं, इन मामलों में आम तौर पर गले का दर्द नहीं होता। साथ ही लिम्फ नोड की प्रकृति सामान्यतः पुरानी तुलना में भिन्न होती है।
बैक्टेरियल टॉन्सिलाइटिस
उत्प्रेरक: प्रायः β-हिमोलिटिक समूह A के स्ट्रेप्टोकोकस (Streptococcus pyogenes)।
संक्ररण: बूंदों द्वारा संचरण और प्रत्यक्ष संपर्क।
विशिष्ट लक्षण: तीव्र शुरुआत के साथ गले का दर्द, निगलने में तकलीफ, बुखार, ठंड लगना (शक्ल में काँपना), थकावट, सिरदर्द, भूख कम लगना, संभवतः हल्का गर्दन कड़ा होना, वृद्धि हुई टॉन्सिल्स जिनमें एक्ससुडेट हो सकता है, मुंह से दुर्गंध तथा दबाव पर दर्द करने वाले बढ़े हुए अग्र सरवाईकल लिम्फ नोड्स।
निदान: क्लिनिकल जाँच, घाँट का स्वाब लेकर तेज़ परीक्षण या कल्चर, आवश्यकता अनुसार CRP या BSG।
वायरल फ़ैरिंजाइटिस
उत्प्रेरक: Epstein-Barr-वायरस (Herpesviridae)।
संक्ररण: बूंदों के साथ-साथ लार के संपर्क से (“किसिंग डिजीज”)।
विशिष्ट लक्षण: तीव्र रोगभान (मलेज़), गर्दन के लिम्फ नोड्स की वृद्धि, अक्सर वाल्डेयर‑फैरिंक्स रिंग की सहभागिता, प्लीहा बढ़ना (splenomegalie), जिगर की वृद्धि (hepatomegalie) और कभी‑कभी दाने (एक्जेंटहम), विशेषकर एम्पिसिलिन देने के बाद।
निदान: रक्तचित्र में लिंफोसाइटोसिस और अतिपर्याप्त लिंफोसाइट्स, मोनोस्पॉट‑टेस्ट तथा EBV‑सीरोलॉजी।
एपिग्लॉटाइटिस
उत्प्रेरक: पहले मुख्यतः Haemophilus influenzae प्रकार b, आज टीकाकरण के कारण कम पाया जाता है।
संक्ररण: बूंदों के माध्यम से।
विशिष्ट लक्षण: अचानक शुरुआत, तीव्र गले का दर्द, गंभीर डिस्फैगिया, लार का बहना, घनी/घसी हुई बोली, प्रेरणीय स्ट्रिडोर (inspiratorischer Stridor) और सामान्यतः खाँसी का अभाव।
निदान: सतर्क क्लिनिकल जाँच, सुरक्षित सेटिंग में आवश्यकता अनुसार लैरिंगोस्कोपी तथा रक्त कल्चर।
Therapie
समूह A के स्ट्रेप्टोकोकस संक्रमणों में जटिलताओं से बचने के लिए — जैसे पेरिटॉन्सिलर एब्सेस, स्कार्लेट बुखार (Scharlach), टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम या रूमेटिक बुखार — पेनिसिलिन के साथ उपचार शुरू किया जाना चाहिए, मौखिक या अंतःशिरा रूप में।
वायरल संक्रमणों में बाह्य/कंजरवेटिव (सहायक) उपचार आउटपेशेंट आधार पर उपचार का मूल हैं।
बुज़ुर्ग रोगियों या महत्वपूर्ण सह‑रुग्णताएँ रखने वाले व्यक्तियों में अस्पताल में दाखिला आवश्यक हो सकता है, विशेषकर निमोनिया के संदेह में।
कई सर्दी‑जुकाम की दवाओं में Sympathomimetika होते हैं, जो रक्तचाप बढ़ा सकते हैं।
